13 July 2026

ललितपुर में बना "महाराजा खेत सिंह जूदेव प्रवेश द्वार" — विधायक रामरतन कुशवाहा की पहल से समाज में हर्ष की लहर

ललितपुर में बना महाराजा खेत सिंह जूदेव प्रवेश द्वार
विधायक रामरतन कुशवाहा की पहल से समाज में हर्ष की लहर

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)। बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर अपने वीर पूर्वजों को नमन करते हुए गौरव से भर उठी है। ललितपुर नगर में विधायक निधि से एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया है, जिसे नाम दिया गया है — "महाराजा खेत सिंह जूदेव प्रवेश द्वार"। यह द्वार सदर विधायक श्री रामरतन कुशवाहा जी के प्रयासों से साकार हुआ है और आज पूरे क्षेत्र में इस सराहनीय पहल की चर्चा हो रही है।

धूसर व नारंगी रंगों में सजा यह भव्य द्वार शहर की मुख्य सड़क पर दोनों ओर सुदृढ़ स्तंभों पर टिका है। द्वार पर स्पष्ट अक्षरों में अंकित है — "महाराजा खेत सिंह जूदेव प्रवेश द्वार, सौजन्य से श्री रामरतन कुशवाहा (एड.) विधायक ललितपुर की विधायक निधि से निर्मित।" यह द्वार न केवल शहर की शोभा बढ़ा रहा है, बल्कि आने-जाने वाले प्रत्येक नागरिक को अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का स्मरण भी कराता रहेगा।

महापुरुषों का सम्मान ही समाज का सम्मान है

जिस समाज में अपने पूर्वजों और महापुरुषों को याद रखा जाता है, वह समाज ही अपनी संस्कृति और अस्मिता को जीवंत बनाए रख पाता है। इसी भावना के अनुरूप विधायक रामरतन कुशवाहा जी ने महाराजा खेत सिंह जूदेव के नाम पर यह भव्य द्वार बनवाकर सम्मान और प्रेरणा का एक सुंदर संदेश दिया है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि विकास कार्यों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसे समय में जब अधिकांश सार्वजनिक निर्माण-कार्य केवल भौतिक अवसंरचना तक सीमित रह जाते हैं, विधायक जी का यह कदम सराहनीय है कि उन्होंने विधायक निधि का उपयोग समाज की जड़ों को सींचने में किया। इस सराहनीय पहल के लिए क्षेत्र की जनता और खंगार क्षत्रिय समाज की ओर से विधायक रामरतन कुशवाहा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी जा रही हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से जनप्रतिनिधि और जनता के बीच का जुड़ाव और मजबूत होता है, क्योंकि यह द्वार केवल एक निर्माण-कार्य नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं और आस्था का प्रतीक भी है। द्वार के उद्घाटन के अवसर पर क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया, जहां लोगों ने विधायक जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए "रामरतन कुशवाहा सदर विधायक जी जिंदाबाद" के नारे भी लगाए। लोगों में यह भावना भी देखी गई कि जिस प्रकार वर्ष 2017 और 2022 में जनता ने उन पर विश्वास जताया, उसी प्रकार आगामी चुनावों में भी यह भरोसा कायम रहेगा।

कौन थे महाराजा खेत सिंह खंगार ?

महाराजा खेत सिंह खंगार जूदेव , जिन्होंने अपने पराक्रम और स्वाभिमान से इस क्षेत्र को एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य के रूप में स्थापित किया।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार महाराजा खेत सिंह का जन्म संवत ११९७ (ईस्वी सन् 27 दिसम्बर 1140) में गुजरात के जूनागढ़ राज्य के शासक परिवार में हुआ था। उनके पिता जूनागढ़ के अधिपति रा' रुद्रदेव (द्वितीय) थे और माता का नाम किशोर कुँवर बाई था। बाल्यकाल से ही खेता (महाराजा खेत सिंह का बचपन का नाम) कुश्ती और शस्त्र-विद्या में अत्यंत निपुण थे। कहा जाता है कि उन्होंने एक बार निहत्थे ही एक सिंह का सामना कर उसे अपने बाहुबल से परास्त कर दिया था, जिससे प्रभावित होकर तत्कालीन दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने उन्हें अपने साथ इंद्रप्रस्थ आमंत्रित किया और "सिंह" की उपाधि से विभूषित किया।

आगे चलकर महाराजा खेत सिंह पृथ्वीराज चौहान के प्रमुख सामंत और विश्वस्त सेनानायक बने। उन्होंने चौहान सम्राट के साथ मिलकर अनेक युद्धों में अद्वितीय पराक्रम दिखाया, जिससे प्रसन्न होकर पृथ्वीराज चौहान ने सन् 1181 ई. में उन्हें जिझौतिखण्ड (वर्तमान बुंदेलखंड) क्षेत्र का शासक घोषित किया और उनका राज्याभिषेक कराया। महाराजा खेत सिंह ने कुण्डार नामक स्थान पर एक सुदृढ़ और दुर्गम किले का निर्माण करवाया, जो आगे चलकर "गढ़कुण्डार" के नाम से विख्यात हुआ और उन्होंने इसे अपनी राजधानी बनाया।

सन् 1192 ई. में तराईन के द्वितीय युद्ध में जब पृथ्वीराज चौहान को मोहम्मद गौरी के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा और दिल्ली विदेशी आक्रांता के अधीन हो गई, तब महाराजा खेत सिंह ने जिझौतिखण्ड को एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य घोषित कर दिया। इस प्रकार वे खंगार वंश के संस्थापक और बुंदेलखंड में स्वतंत्र हिन्दू शासन-व्यवस्था के प्रवर्तक के रूप में इतिहास में अमर हो गए। उनके बाद महाराजा हुरमत सिंह, महाराजा मानसिंह, महाराजा खूबसिंह सहित अनेक प्रतापी शासकों ने गढ़कुण्डार से लगभग डेढ़ शताब्दी तक स्वतंत्र शासन किया, जब तक सन् 1347 ई. में मोहम्मद बिन तुगलक के आक्रमण में राजा मानसिंह सहित अनेक वीर राजपूत वीरगति को प्राप्त हुए और रानी केसर दे तथा अन्य वीरांगनाओं ने जौहर कर अपने स्वाभिमान की रक्षा की।

ललितपुर के लिए एक नई पहचान

ललितपुर, जो बुंदेलखंड क्षेत्र का एक प्रमुख नगर है और जहां आज भी खंगार क्षत्रिय समाज की गहरी सांस्कृतिक जड़ें मौजूद हैं, के लिए यह प्रवेश द्वार एक नई पहचान बनकर उभरेगा। यह द्वार शहर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह स्मरण कराता रहेगा कि यह भूमि किसी सामान्य नगर की भूमि नहीं, बल्कि एक ऐसे शूरवीर सम्राट की कर्मभूमि से जुड़ी है, जिसने विदेशी सत्ता के आगे झुकने के बजाय स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना का साहस दिखाया।

समाज में आभार का माहौल

द्वार के निर्माण की खबर सामने आते ही खंगार क्षत्रिय समाज तथा बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर भी इस द्वार की तस्वीरें तेजी से साझा की जा रही हैं और लोग विधायक रामरतन कुशवाहा जी के इस कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं। समाज के बुजुर्गों का मानना है कि इस प्रकार के प्रयासों से न केवल इतिहास संरक्षित होता है, बल्कि युवा पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गर्व और जागरूकता भी बढ़ती है।

निश्चित रूप से यह द्वार आने वाले समय में ललितपुर की पहचान बनेगा और महाराजा खेत सिंह जैसे महान योद्धा-सम्राट की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब जनप्रतिनिधि समाज की भावनाओं को समझते हुए कार्य करते हैं, तो इतिहास केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर सड़कों, द्वारों और जन-स्मृति का हिस्सा बन जाता है।

(रिपोर्ट: स्थानीय संवाददाता, ललितपुर)

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