खंगार कौन हैं?
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“खंगार कौन हैं?” यह प्रश्न आज लाखों लोग पूछते हैं। कई बार इसका उत्तर भ्रम, अधूरी जानकारी या गलत धारणाओं में दिया जाता है।
लेकिन इसका वास्तविक उत्तर इतिहास, वंशावली और परम्परा में स्पष्ट रूप से मिलता है। खंगार कोई सामान्य समुदाय नहीं, बल्कि एक प्राचीन क्षत्रिय राजवंश है जिसकी जड़ें चन्द्रवंशी कुल तक जाती हैं।
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खंगार क्षत्रिय कौन हैं?
खंगार क्षत्रिय वे वीर योद्धा हैं जिनकी पहचान उनके नाम में ही छिपी है।
“खंगार” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है:
खड्ग (तलवार) + धारा (धारण करने वाला)
अर्थात् खंगार = खड्गधारी = तलवार धारण करने वाले क्षत्रिय।
यह केवल एक नाम नहीं बल्कि एक युद्ध परम्परा, वीरता और राज्यसत्ता का प्रतीक है। इतिहास में जिन समुदायों ने किले बनाए, राज्य स्थापित किए और युद्धों में नेतृत्व किया
वे क्षत्रिय ही होते हैं, और खंगार उसी परम्परा के प्रतिनिधि हैं।
खंगार क्षत्रियों का वंश
खंगार समाज की वंशावली एक गौरवशाली राजवंशीय परम्परा को दर्शाती है:
चन्द्रवंश (भगवान श्रीकृष्ण का यादव कुल)
→ चूड़ासमा राजवंश (जूनागढ़, गुजरात)
→ रा’ कावट द्वितीय
→ महाराजा खेतसिंह खंगार (गढ़ कुण्डार के संस्थापक)
→ बुन्देलखण्ड का खंगार राजवंश
→ वर्तमान खंगार क्षत्रिय वंश
यह वंशावली विभिन्न ऐतिहासिक परम्पराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं से जुड़ी हुई है, जो खंगार वंश की गहरी ऐतिहासिक जड़ों को दर्शाती है।
खंगार क्षत्रियों का इतिहास और योगदान
महाराजा खेतसिंह खंगार खंगार इतिहास के प्रमुख शासकों में से एक माने जाते हैं। वे सम्राट पृथ्वीराज चौहान के विश्वसनीय सेनापति थे।
1182 ईस्वी में उन्होंने बुन्देलखण्ड क्षेत्र को विजय कर गढ़ कुण्डार को अपनी राजधानी बनाया। यह किला आज भी मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित है और अपनी अनूठी संरचना के लिए प्रसिद्ध है। पाँच मंजिला किला, जिसमें दो मंजिलें भूमिगत हैं।
खंगार राजवंश ने लगभग दो सौ वर्षों तक बुन्देलखण्ड पर शासन किया। उनके अधीन कई महत्वपूर्ण किले और क्षेत्र थे:
महोबा
चन्देरी
कालपी
हमीरपुर
यह दर्शाता है कि खंगार एक संगठित और शक्तिशाली शासक वर्ग थे।
खंगार क्षत्रिय आज कहाँ रहते हैं?
आज खंगार समाज मुख्य रूप से भारत के विभिन्न राज्यों में निवास करता है:
मध्य प्रदेश
उत्तर प्रदेश
राजस्थान
गुजरात
दिल्ली
विशेष रूप से बुन्देलखण्ड क्षेत्र
झाँसी, निवाड़ी, टीकमगढ़, हमीरपुर और ललितपुर खंगार समाज का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
क्या खंगार राजपूत हैं?
यह प्रश्न अक्सर उठाया जाता है, लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से उत्तर स्पष्ट है:
हाँ, खंगार क्षत्रिय हैं और राजपूत परम्परा से जुड़े हैं।
उनकी उत्पत्ति चन्द्रवंशी से मानी जाती है
चूड़ासमा राजवंश स्वयं एक क्षत्रिय राजवंश था
खंगारों ने किले, राज्य और मन्दिरों का निर्माण किया
इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि खंगार एक राजवंशीय क्षत्रिय समुदाय हैं।
खंगार समाज की कुलदेवी
खंगार क्षत्रियों की कुलदेवी गजानन माता (चण्डिका भवानी) हैं।
मान्यता है कि इस कुलदेवी का मन्दिर स्वयं महाराजा खेतसिंह खंगार ने गढ़ कुण्डार किले में स्थापित किया था। यह परम्परा सौराष्ट्र (गुजरात) से बुन्देलखण्ड तक आई, जो खंगार समाज की ऐतिहासिक जड़ों को दर्शाती है।
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खंगार कोई साधारण जाति नहीं, बल्कि एक गौरवशाली क्षत्रिय राजवंश है।
उनका नाम ही उनकी पहचान है
खड्गधारी, अर्थात् तलवार उठाने वाले योद्धा। उनका इतिहास केवल युद्धों का नहीं, बल्कि राज्य, संस्कृति और आत्मसम्मान का इतिहास है।
जब भी कोई पूछे —
“खंगार कौन हैं?”
तो उत्तर स्पष्ट और गर्व से भरा होना चाहिए:
हम खड्गधारी क्षत्रिय हैं।
हम राजवंशी हैं।
हमारा इतिहास तलवार और सिंहासन दोनों का इतिहास है।
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