प्राचीन काल / वंश एवं उत्पत्ति

खंगार क्षत्रिय सम्पूर्ण वंशावली: चूड़ासमा से गढ़ कुण्डार तक

Complete Khangar Kshatriya Genealogy: From Chudasama to Garh Kundar

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चूड़ासमा राजवंश से खंगार राजवंश तक की सम्पूर्ण प्रामाणिक वंशावली — तिथियों, शासनकालों और ऐतिहासिक स्रोतों सहित।

यह लेख खंगार क्षत्रिय समाज की सम्पूर्ण वंशावली को तिथिबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है। यह वंशावली चूड़ासमा राजवंश की प्रमाणित सूचियों, खंगार समुदाय के वहीवंचा भाट-अभिलेखों, पृथ्वीराज रासो, और आल्हा खण्ड के आधार पर तैयार की गई है।

चूड़ासमा राजवंश (जूनागढ़, सौराष्ट्र)

रा' खेंगार द्वितीय — शासनकाल: 1098–1125 ई. — जूनागढ़ के सर्वाधिक प्रतापी राजा। सिद्धराज जयसिंह से युद्ध में वीरगति प्राप्त। खंगार क्षत्रियों के प्रपितामह।

रा' नोघन तृतीय — शासनकाल: 1125–1140 ई. — सोलंकी आक्रमण के बाद चूड़ासमा सत्ता के पुनर्स्थापक। खंगार क्षत्रियों के पितामह।

रा' कावट द्वितीय (राजा कटव-2) — शासनकाल: 1140–1152 ई. — जूनागढ़ के राजा। महाराजा खेतसिंह खंगार के पिता। मृत्यु 1152 ई.।

रानी किशोर कुँवर बाई — रा' कावट द्वितीय की पत्नी। महाराजा खेतसिंह खंगार की माता।

खंगार राजवंश (गढ़ कुण्डार, बुन्देलखण्ड)

महाराजा खेतसिंह खंगार — जन्म: 27 दिसम्बर 1140 ई. (वि.सं. 1197, पौष शुक्ल पक्ष)। मृत्यु: लगभग 1212 ई.। खंगार राजवंश के संस्थापक। पृथ्वीराज चौहान के विश्वसनीय सेनापति। 1182 ई. में बुन्देलखण्ड विजय। गढ़ कुण्डार को राजधानी बनाया। 1192 ई. में स्वतन्त्र राज्य की स्थापना।

नन्द / भुवन सिंह — खेतसिंह के पुत्र एवं उत्तराधिकारी। शासनकाल लगभग 1212 ई. से आरम्भ।

खूब सिंह खंगार — तेरहवीं शताब्दी मध्य। गढ़ कुण्डार दुर्ग का प्रमुख जीर्णोद्धार एवं विस्तार किया।

[मध्यवर्ती शासक — विभिन्न परम्पराओं में नाम भिन्न]

नागदेव खंगार — खंगार राजवंश के अन्तिम प्रमुख राजा। बुन्देला विश्वासघात में वीरगति प्राप्त (लगभग 1288–1347 ई., तिथि विवादित)।

कालक्रम सारणी

1098 ई. — रा' खेंगार द्वितीय का जूनागढ़ में राज्यारोहण

1125 ई. — रा' खेंगार की शहादत; सोलंकी आक्रमण

1125 ई. — रा' नोघन तृतीय द्वारा चूड़ासमा सत्ता का पुनर्स्थापन

1140 ई. — रा' कावट द्वितीय का राज्यारोहण; खेतसिंह का जन्म

1152 ई. — रा' कावट द्वितीय की मृत्यु; खेतसिंह का जूनागढ़ से प्रस्थान

1170 ई. (अनुमानित) — खेतसिंह का पृथ्वीराज चौहान के दरबार में आगमन

1182 ई. — महोबा का युद्ध; खेतसिंह की बुन्देलखण्ड विजय

1182-1190 ई. — जिनगढ़ (गढ़ कुण्डार) दुर्ग पर अधिकार; राजधानी की स्थापना

1192 ई. — तराइन का द्वितीय युद्ध; चौहान साम्राज्य का पतन; खेतसिंह द्वारा स्वतन्त्र खंगार राज्य की घोषणा

1212 ई. (अनुमानित) — महाराजा खेतसिंह खंगार की मृत्यु; उत्तराधिकारी नन्द/भुवन सिंह

13वीं शताब्दी मध्य — खूब सिंह खंगार द्वारा गढ़ कुण्डार का जीर्णोद्धार

1288–1347 ई. (तिथि विवादित) — बुन्देला विश्वासघात, गढ़ कुण्डार का पतन; राजकुमारी केसर दे का जौहर

इस वंशावली से यह स्पष्ट है कि खंगार क्षत्रिय समाज की उत्पत्ति एक प्रमाणित, तिथिबद्ध, और ऐतिहासिक रूप से सुसंगत राजसी परम्परा से हुई है। यह न किसी कल्पना पर, न किसी दावे पर बल्कि शिलालेखों, राज-वंशावलियों, और शताब्दियों पुरानी भाट-परम्पराओं पर आधारित है।

स्रोत एवं संदर्भ

1. पृथ्वीराज रासो — चन्द बरदाई
2. आल्हा खण्ड — जगनिक
3. चूड़ासमा राजवंश वंशावली — Wikipedia: Legendary and early kings of Chudasama dynasty
4. Kavat (king) — Wikipedia
5. बुन्देलखण्ड में खंगार राज्य — राम औतार सिंह खंगार
6. खंगार समुदाय वहीवंचा भाट अभिलेख
7. Garh Kundar — Wikipedia
8. Madhya Pradesh Tourism — Garh Kundar Fort details
9. चण्डिका भवानी गजानन माता मन्दिर — YouTube documentation
अस्वीकरण: यह सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों से संकलित है और केवल शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्य से प्रस्तुत है। पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं दी जाती।
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