"खंगार" शब्द संस्कृत के खड्ग (तलवार) और धारा (धारण करने वाला) से बना है। यह नाम ही बताता है कि खंगार क्षत्रिय जन्मजात योद्धा वंश हैं।
किसी समुदाय का नाम उसकी पहचान का सबसे मूल तत्व होता है। "खंगार" शब्द में ही इस समाज का सम्पूर्ण इतिहास और स्वभाव समाया हुआ है।
संस्कृत व्युत्पत्ति
"खंगार" शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है:
खड्ग — जिसका अर्थ है "तलवार"
धारा — जिसका अर्थ है "धारण करने वाला" या "वाहक"
खड्ग + धारा = खड्गधार → खंगार
इसका शाब्दिक अर्थ है "तलवार धारण करने वाले" अर्थात् "खड्गधारी क्षत्रिय"।
यह कोई सामान्य जातिसूचक नाम नहीं है। यह एक सैनिक उपाधि है जो केवल उन्हें दी जाती थी जिनका जन्म ही शस्त्र उठाने के लिए हुआ था। कोई कृषक समुदाय या व्यापारी वर्ग इस नाम को धारण नहीं कर सकता — यह नाम युद्धभूमि में अर्जित किया गया, तलवार की धार पर गढ़ा गया।
ऐतिहासिक सन्दर्भ
खंगार क्षत्रिय समाज का तलवार से सम्बन्ध केवल नाम तक सीमित नहीं है। इतिहास के प्रत्येक काल में खंगार क्षत्रियों ने शस्त्रधारी की भूमिका निभाई है:
मध्यकाल में: महाराजा खेतसिंह खंगार को पृथ्वीराज रासो में "उप-दुर्गाध्यक्ष" के रूप में वर्णित किया गया है। वे स्वयं एक दुर्ग-सेनापति थे जिन्होंने तलवार के बल पर गढ़ कुण्डार विजय किया।सौराष्ट्र में: खंगार समुदाय ने "दुर्गपाल" (किला-रक्षक) और "कोतवाल" (नगर-सेनापति) के पद पर वंशानुगत रूप से कार्य किया। सोमनाथ मन्दिर की रक्षा में खंगार योद्धाओं ने "रक्षक" की भूमिका निभाई — ठीक वैसे ही जैसे उनका नाम सूचित करता है।
बुन्देलखण्ड में: खंगार राजवंश ने महोबा, गढ़कुण्डार, चन्देरी, कालपी, और हमीरपुर सहित अनेक दुर्गों पर शासन किया। प्रत्येक दुर्ग में खंगार सेनापतियों ने तलवार से रक्षा की।
स्वतन्त्रता संग्राम में: 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में भी खंगार क्षत्रियों ने अपनी पारम्परिक योद्धा भूमिका का निर्वहन किया।
नाम में निहित गौरव
"खंगार" कहलाना गर्व की बात है। यह नाम बताता है कि:
हम जन्मजात क्षत्रिय हैं — शस्त्र हमारा स्वभाव है, हमारी विवशता नहीं।
हम रक्षक हैं — मन्दिरों, दुर्गों, और राज्यों की रक्षा हमारा धर्म रहा है।
हम वीर हैं — सोमनाथ से लेकर गढ़ कुण्डार तक, खंगार तलवार ने कभी समर्पण नहीं किया।
जब कोई व्यक्ति कहता है "मैं खंगार हूँ"
वह यह कह रहा है कि "मैं खड्गधारी क्षत्रिय कुल का वंशज हूँ।"
इससे बड़ा गौरव और क्या हो सकता है।
चित्र दीर्घा
स्रोत एवं संदर्भ
2. पृथ्वीराज रासो — चन्द बरदाई (खेतसिंह का उप-दुर्गाध्यक्ष के रूप में उल्लेख)
3. Khangar (community) — Wikipedia
4. बुन्देलखण्ड में खंगार राज्य — राम औतार सिंह खंगार
5. Joshua Project — Khangar (Hindu traditions) in India